
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
********************
यदि इंसान शिक्षा से पहले संस्कार, व्यापार से पहले व्यवहार, भगवान से पहले माता-पिता को पहचान ले हो तो ज़िंदगी में कभी कोई कठिनाई आ ही नहीं सकती। हैसियत का परिचय हमें तब देना चाहिए, जब बात आत्म सम्मान की हो। अन्यथा सादगी ही सबसे बड़ा परिचय है। *सुख में शांति है, यह हमारा भ्रम है। शांति में सुख है, यह वास्तविकता है।*
हम लोग उस जमाने की पैदाइश हैं, जब रोते हुए को चुप कराने के लिए दोबारा पीटा जाता था। कभी-कभी कुछ लोग ज़िंदगी में सबक बनकर आते हैं। आँखों में ऐसी धूल झोंक जाते हैं, कि पहले से ज्यादा साफ नजर आने लगता है।
भले ही आप अलग रहिए, मगर अपने माता-पिता और भाइयों से जुड़े रहिए, क्योंकि मुसीबत में यही अपने आपके आसपास नजर आएँगे, बाकी की दुनिया हाल पूछने भी नहीं आएगी। समय, सेहत, दोस्त और और व्यापार ऐसे कीमती निवेश हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ और अधिक मूल्यवान हो जाते हैं। पिताजी कभी नहीं कहते थे कि “मेरे पास पैसे नहीं है,” माँ ने कभी नहीं कहा कि “मेरी तबियत खराब है।” इन्हीं २ झूठ की वजह से आपकी दुनिया सुंदर है। *ध्यान रखिए- शब्द यात्रा करते हैं, इसलिए पीठ पीछे किसी की निंदा ना करें।* अपनी जबान पर नियंत्रण रखिए, क्योंकि जीभ एक तेज धार चाकू की तरह है जो बिना खून-बहाए काम तमाम कर देती है।
*जब भी अवसर मिले, पुण्य करते रहिए, क्योंकि ‘पुण्य’ छप्पर फाड़कर देता है और ‘पाप’ थप्पड़ मारकर लेता है।* यदि आप अपने घर के बड़े हैं, तो परिवार का मालिक बनकर नहीं, माली बनकर सम्भालो, क्योंकि जिस बगिया का माली बहुत अच्छा होता है, वहाँ सभी फूल महकते हैं। फूल गवाह हैं कि लगाता है कि ‘तोड़े वही’ जाते हैं, जो ‘अच्छे’ होते हैं। *कौन कहता है कि नेचर और सिग्नेचर कभी नहीं बदलते? यदि उँगली पर चोट लगे तो सिग्नेचर बदल जाता है और चोट दिल पर लगे तो नेचर बदल जाता है।* आम आदमी अपने बच्चों को खिलौने नहीं दिला पाता है और एक आमिर खान है, जो अपने बच्चों को नई-नई अम्मियाँ दिला रहा है।
याददाश्त केवल दुर्घटना से नहीं जाती है, कई बार उधार लेने के बाद भी चली जाती है। डॉक्टर बहुत ही दयालु होते हैं, वो मरीज का घी, तेल, शक्कर, आलू, बेसन और मैदा बंद करवा देते हैं, ताकि मरीज इन बचे हुए रूपयों से हर माह दवाई खरीद सके। संस्कार की शिक्षा के लिए किसी स्कूल जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ‘माँ’ कहलाने वाला पूरा विश्वविद्यालय घर में है। केवल शरीर को नहीं, बल्कि अपने शब्दों को भी सुंदर रखिए, क्योंकि लोग आपकी शक्ल भले भूल जाएँ, लेकिन आपके शब्दों को नहीं भूलते। *ठोकर’ अत्यंत जरूरी है इस ज़िंदगी में, इससे इंसान ज़िन्दगी में सम्भल कर चलना सीख जाते हैं।*
*बचपन में सुना था-सबसे मीठी आवाज कोयल की होती है, पर आधुनिक शोध के अनुसार सबसे मीठी आवाज उधार लेने और धोखा देने वाले इंसान की होती है। एक ताऊ मरने मरने वाला था, तो घर वालों ने कहा- “अब तो भगवान का नाम ले लो।” “ताऊ बोला, अब क्या लेना- अब तो १०-१५ मिनट में आमना-सामना हो जाएगा । शराब को तो हमने व्यर्थ में बदनाम कर रखा है, नशा तो मोबाईल में उससे कई गुना ज्यादा है। *याद रखिए जहाँ मूर्खों का मंच होता है, वहाँ हर कोई सरपंच होता है।* पक्के रिश्ते तो बचपन में बनते थे। अब तो लोग बात भी मतलब से करते हैं।
परिस्थितियाँ इंसान को चुप करा देती है, वरना बोलने में तो सारी दुनिया माहिर है। छोटे लोगों से अपने रिश्ते खराब न करें, क्योंकि छोटे लोग ही कंधे पर आपको शमशान तक लेकर जाते हैं; बड़े लोग तो केवल कार से देखने आते हैं। जब लोग कीचड़ से बचकर चलते हैं, तो कीचड़ को यह घमंड हो जाता है, कि लोग उससे डरते हैं। *अजीब बेवकूफ है इंसान, जो चीज साथ चलती है उसको छोड़ रहा है और जो यहाँ रह जाती है उसको जोड़ रहा है।* अब भी वक़्त है, ध्यान दीजिए, वरना ये गलती आप भी करेंगे- कैमरे लगे हैं मंदिर और मस्जिदों में, और लोग कहते हैं कि ऊपर वाला सब देख रहा है।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻







