
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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*अच्छे जरूर बनें, परन्तु जरूरत से ज्यादा नहीं। अगर ज्यादा अच्छे बनेंगे तो नीम्बू की तरह निचोड़ दिए जाओगे।* याद रखिए, जहां से छल शुरू होता है, वहां से महाभारत शुरू होता है। *जो चीज मन की शांति को छीन ले-उसे छोड़ देना ही समझदारी है; चाहे वह आदत हो, सोच हो या कोई रिश्ता।* एक बार थानेदार, कलेक्टर और मास्टर बैठे हुए थे। तब थानेदार ने शेखी बघारते हुए कहा-मेरा बहुत रौब है, जब जी चाहे, किसी को भी पीट सकता हूँ। इसका समर्थन करते कलेक्टर ने कहा- मैं भी जिले का राजा हूँ, मैं जो चाहे कर सकता हूँ। आखिरी में मास्टर ने कहा- मेरा तो काई रौब नहीं है, सारा दिन छात्रों को चाँटे मारता हूँ, आगे उनकी किस्मत-कलेक्टर बनें या थानेदार।
शादीशुदा व्यक्ति की गर्लफ्रेन्ड उसके घर आई। उसको देखकर बीबी चिल्लाई और बोलने लगी- एक म्यान में २ तलवार नहीं रह सकती है। पति ने प्यार से समझाया अब तलवार का जमाना नहीं है अब रिवाल्वर का जमाना आ गया है और इसमें हमेशा ६ गोलियाँ रहती हैं।
*आज नॉन खटाई खाने का अवसर प्राप्त हुआ। यह बहुत मीठी और स्वादिष्ट होती है, पर मुझे अभी तक समझ नहीं आ रहा है, कि मीठी होने के बाद भी इसका नाम नॉन खटाई क्यों रखा है? अगर नॉन मिठाई रखते तो क्या बिगड़ जाता।* जब भी अवसर मिले, किसी के हँसने की वजह बनो, क्योंकि जलाने के लिए तो सारी दुनिया तैयार बैठी है। दूसरों के गुनाह गिनने से हम बेगुनाह नहीं हो जाते हैं। टेंशन एक ऐसा उपहार है, जो हमारे अपने ही हमें देते हैं।
*गलती पीठ की तरह होती है, इसलिए हमें हमेशा औरों की ही दिखती है; अपनी नहीं। कुछ लोग शकुनि की तरह होते हैं, खेल भी सारे खेलते है और महान बन जाते हैं। फिर ऐसा दिखाते हैं, जैसे उन्हें कुछ पता ही नहीं।* सप्ताह में ७ वार होते हैं और आठवां वार है, परिवार। अगर आपका आठवां वार ठीक है तो हर वार, त्योहार बन जाता है। सौ साल के एक बुजुर्ग बीड़ी पी रहे थे, किसी पत्रकार ने प्रश्न किया- बाबा जी बीड़ी क्यों पीते हो, इससे फेफड़े खराब हो जाते हैं, खांसी भी होती है। बुजुर्ग बोले-क्या करूँ बेटा – आदत पड़ गई है। शराब पीने के बाद बीड़ी पिए बिना चैन नहीं आता। पत्रकार ने फिर कहा- बाबा आपको कोई टोकता नहीं है। बुजुर्ग ने कहा – क्या बताऊं बेटा- जो लोग रोका-टोकी करते थे सब ऊपर चले गए। आज बहुत दिनों बाद तुमने टोका है।
*इतिहास में २ प्रकार के मामा अमर हैं एक, शकुनि और दूसरा कंस। अब बताइए आपके मामा कौन से हैं ?* हमेशा ईमानदारी से पैसे कमाएं, आपके शौक भले पूरे न होंगे, बल्कि नींद रोज पूरी होगी। किसी के दाएं-बाएं खड़े होने से आपका किरदार ऊँचा नहीं होता- अगर स्वयं की औकात होगी तो दुनिया कद्र करेगी। *मृत्यु के बाद एक लड़की यमराज के पास पहुंची। यमराज ने पूछा- तुम स्वर्ग जाना चाहती हो या नरक ? लड़की ने कहा -प्रभु आप पृथ्वी से मेरा मोबाईल और चार्जर मंगवा दीजिए, मैं कहीं भी रह लूँगी।*
फेसबुक भी कमाल की चीज है, जिनकी माला फेरने की उम्र हो गई है, वो भी वरमाला डालने की आस नहीं छोड़ रहे हैं। *आज लड़की वाले मुझे देखने आ रहे थे, रोड बहुत खराब था तो वापस चले गए। बोले-जब रास्ता इतना खराब है तो लड़का कितना खराब होगा ?* सोचा कुछ, हुआ कुछ और मिला कुछ -यही जीवन है ! हमारी ज़िंदगी एक खेल है, जिसमें हम खिलाड़ी भी हो सकते हैं और खिलौना भी। यह हमारे व्यवहार के ऊपर निर्भर रहता है। इस कलियुग में हमेशा तैयारी के साथ रहें, क्योंकि इंसान और मौसम कब बिगड़ जाए, किसी को नहीं पता।
*जिस दिन हम यह समझ जाएंगे कि सामने वाला गलत नहीं है, सिर्फ उसकी सोच हमसे अलग है; उस दिन जीवन में सारे दु:ख स्वयं ही समाप्त हो जाएंगे।* जीवन है- गलतियाँ होती रहती हैं, बस इरादे गलत नहीं होना चाहिए।
*ज़िंदगी का सबसे बड़ा दु:ख, आँख का अँधा, नाम-नयनसुख।*
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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