
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
********************
एक बात समझ में नहीं आ रही है कि सर में दर्द होता है तो उसे सरदर्द कहते हैं और अगर नाक में दर्द होगा तो उसे ‘दर्दनाक’ कहेंगे क्या? *हर दवा में एक्सपायरी डेट लिखी रहती है, पर शराब क्या अमृत है कि उसमें एक्सपायरी डेट नहीं लिखी रहती है। विश्व का सबसे बड़ा आश्चर्य- यहाँ ‘लेबर रूम’ में ‘लेबर’ नहीं रहते हैं।* एक लड़का बड़ी उम्र की औरत को बार-बार घूरकर देख रहा था तो उस औरत ने कहा-कुछ तो शर्म करो मैं तुम्हारी माँ की उम्र की हूँ। लड़के ने उत्तर दिया- मैं भी अपने लिए नहीं, अपने अब्बू के लिए लड़की देख रहा हूँ। जो चीज मन की शांति को छीन ले, उसे छोड़ देना ही समझदारी है-चाहे वह आदत हो, सोच हो या कोई रिश्ता।
झूठे लोगों के मुँह मत लगिए, आप बहस में उनसे कभी जीत नहीं पाएंगे, क्योंकि यह कलियुग है। यहाँ सच अकेला चलता है और झूठ बारात लेकर चलता चलता है। ‘मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में’ यह कहने वाले अक्सर शादी के बाद यह गाना गाते हैं- ‘हमसे क्या भूल हुई, जो ये सजा हमको मिली।’ *मजे और आनंद में बहुत फर्क होता है, मजे के लिए पैसे की जरूरत होती है और आनंद के लिए सिर्फ परिवार और मित्र की।* जीभ में हड्डी नहीं होती है, फिर भी इंसान की जीभ सारी हड्डियाँ तुड़वाने की ताकत रखती है। पापा जब पीटते हैं तो मम्मी कहती है-रहने दो, अब लड़का बड़ा हो गया है, पर जब मम्मी खुद पीटती है- तो बोलती है, तू कब बड़ा होगा ?
*चोर से पुलिस ने पूछा- तुमने एक ही दुकान में लगातार ३ दिन चोरी की? चोर ने कहा- मैंने सिर्फ १ दिन अपनी बीबी के लिए सूट चोरी किया था, बाकी २ दिन तो रंग बदलने गया था।* सेवा करने से क्या फल मिलेगा? ये मत सोचो। सेवा करने का एक मौका मिला;ये ही फल है। जितना हो सके, खामोश रहना ही अच्छा है क्योंकि सबसे ज्यादा गुनाह इंसान की जुबान ही करवाती है। हमें किसी से बदला लेने की सोच कभी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि प्रकृति का नियम है खराब फल अपने-आप पेड़ से गिर जाता है।
हमेशा स्पष्टीकरण देने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मित्रों को इसकी आवश्यकता नहीं है और शत्रु इस पर विश्वास नहीं करेंगे। हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हमारा दिमाग है, इसलिए इसे हमेशा पॉजिटिव रखें। कभी भी किसी से ईर्ष्या न करें, क्योंकि ईर्ष्या करके हम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते, पर अपनी नींद और सुख-चैन अवश्य खो देते हैं। बहुत आसान होता है, किसी पर ऊँगली उठाना, लेकिन बहुत मुश्किल होता है किसी को उठाने के लिए उसकी ऊँगली को पकड़ना। इसलिए हमेशा अपनी सोंच अच्छी रखिए। *बारिश के पानी का कोई रंग नहीं होता है, पर जब बरसता है तो सारी कायनात को रंगीन बना देता है।*
मानव जीवन दोबारा नहीं मिलने वाला, इसलिए इसे दु:ख में, गुस्से में, नफ़रत में, नाराजगी में या किसी से झगड़ा करने में ना बर्बाद करें लगें। *पूरा देश बेटी बचाने निकला है, बस शर्त इतनी-सी है कि वो पैदा दूसरे के घर हो।* अजीब दुनिया है, वैज्ञानिक ढूंढ रहे हैं मंगल पर जीवन है या नहीं, और हम ढूंढ रहे हैं जीवन में मंगल है या नहीं! डिप्रेशन कोई कुदरती बीमारी नहीं है, यें आपकी ज़िंदगी में मौजूद घटिया लोगों का दिया हुआ तोहफा है। मुझे वो लोग पसंद हैं, जो मुझे पसंद नहीं करते, क्योंकि वो कम-से-कम अपना होने का दिखावा नहीं करते।
*आदमी को हमेशा एक-दूसरे के दुःख में काम आना चाहिए, खुशी में तो हिजड़े भी नाचने आ जाते हैं।*
जब भी हमें खुशियाँ मिलने लगें तो उस व्यक्ति का हमेशा ध्यान रखना चाहिए, जिसकी वजह से खुशियाँ मिली हैं। जब कन्या अपने पिता के घर होती है तो वह ‘रानी’ बन कर रहती है, जब ससुराल जाती है ‘लक्ष्मी’ बनकर जाती है; और ससुराल में काम करते-करते ‘बाई’ बन जाती है। इस प्रकार लड़कियाँ ‘रानी लक्ष्मी बाई’ बन जाती हैं, और फिर वो पति को अंग्रेज समझकर बिना तलवार के इतना परेशान करती हैं कि बेचारा पति अंग्रेज नहीं होकर भी ‘अंग्रेजी’ लेना शुरू कर देता है।
कमी तो होनी ही है, शहर में पानी की,
न किसी की आँख में बचा है, न किसी जज़्बात में।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻






