
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
********************
हाथ उसी का पकड़िए, जो आपका साथ कभी ना छोड़े, जैसे ‘बिजली का तार।’ *अजीब है ये दुनिया- यहाँ बाल सफ़ेद करने में ज़िंदगी निकल जाती है और काले बाल तो आधे घंटे में सफ़ेद हो जाते हैं।* कौन अपना है?, कौन पराया ? यदि आपको परखना है तो मुश्किल वक़्त में उससे पैसे मांग लीजिए। सब अपने-पराए का नशा उतर जाएगा। लोगों का मुँह आप बंद नहीं कर सकते हैं, बेहतर है आप अपने कान बंद कर लीजिए आपकी ज़िंदगी बेहतर हो जाएगी। सुख और दुःख का पैसों से कोई भी संबंध नहीं है, क्योंकि रोने वाले महलों में भी रोते हैं और किस्मत में खुशियाँ हों तो झोपड़ी में भी हँसी गूंजती है।
*इंसान का पतन उसी समय शुरू हो जाता है, जब वह अपनों को गिराने के लिए दूसरों से सलाह लेता है।* इंसान को उतने ही पैर पसारने चाहिए, जितनी चादर हो; नहीं तो आजकल मच्छर पैर में काट सकते हैं। किसी बड़े आदमी के साथ फोटो खिंचाकर उसके साथ ताल्लुक दिखाकर ख़ुश होना भी एक दिमागी गुलामी है, जो आजकल आम है। *मर्द बड़े भोले-भाले होते हैं, अगर कोई औरत प्यार से देख ले तो भूल जाते हैं- घर पर २ बच्चे और एक बीबी भी है।* पेरेंट्स मीटिंग में बच्चे का पिता मैडम को ध्यान से देख रहा था- तभी मैडम बोलीं-सर आपको इतना ध्यान अपने बेटे पर देना है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है कि कोई अनपढ़ ड्राइवर नहीं बन सकता है, क्योंकि उसको सिग्नल की समझ नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सब अनपढ़ बन सकते हैं। यदि आगे बढ़ना चाहते हैं तो देना शुरू कर दें… आना खुद शुरू हों जाएगा… इज्जत भी और बरकत भी। *गधे कभी दौड़ का हिस्सा नहीं बनते हैं, वो हँसते हैं उन घोड़ों पर, जो दौड़ में हार गए।* हमेशा साथी ऐसा चुनिए, जो आपको प्रेरणा दे ना कि चिंता, दबाव और तलाक दे। इंसान आजकल विकल्पों का आदी है। विकल्प मिलते ही उसे…. नए में खूबियाँ और पुराने में कमियाँ नजर आने लगती हैं।
इस दुनिया में बहुत लोग मेरे अपने थे, मुझे सच बोलने की आदत लग गई, अब मैं लावारिस हूँ। उस इंसान पर कभी भी भरोसा नहीं करना चाहिए, जिसका व्यवहार वक़्त के साथ बदलता है। डांट देना किसी मसले का हल नहीं होता, किसी के लिए थोड़ा सरक जाएं तो रिश्ता भी बच जाता है और रास्ता भी निकल जाता है।
*स्कूल से लेकर हॉस्पिटल तक सबको प्राईवेट पर भरोसा है। बस जमाई और कमाई सरकारी चाहिए।* बहुत जरूरी है कुछ जिम्मेदारियों का भार होना, वरना बिना वजन की नौका अक्सर दिशाहीन हो जाती है। यदि आपको रिश्ते की गहराई नापना हो, तो रूठकर देख लो एक बार। जिस तरह लोहे को उसका जंग ही खत्म कर देता है, ठीक उसी प्रकार किसी भी इंसान को उसका घमंड और अहंकार नष्ट कर देता है।
लड़कियों के बहुत नखरे होते हैं, सारा भार एक घर पर ना पड़े, इसलिए भगवान ने उनको दो घर दिए हैं- एक मायका, एक ससुराल। खूबसूरत तो महलों की दासियां भी हुआ करती थी, पर रानी बनने के लिए अदाएं नहीं, मर्यादाएं होनी चाहिए।
इतिहास गवाह है… वैसे तो पति-पत्नी की आपस में कभी नहीं बनती है, पर अगर बन जाए तो फिर पूरे खानदान की उनसे नहीं बनती। आज का कड़वा सच- इंसान की अच्छाई पर सब खामोश रहते हैं, लेकिन यदि चर्चा उसकी बुराई पर हो तो गूंगे भी बोल उठते हैं। हमें ताले की तरह वफादार बनना चाहिए, क्योंकि वह टूटना पसंद करता है-चाबी बदलना नहीं। *आज मैंने एक शराबी से कहा- ध्यान से चलो, वरना नाली में गिर जाओगे। वो बोला- हम देश की अर्थव्यवस्था चलाते हैं और तुम हमें चलना सिखाओगे?*
पंडित जी की कथा और बीवी की व्यथा एक जैसी होती है, समझ में ज्यादा कुछ नहीं आता, फिर भी ध्यान लगाकर सुनने का नाटक करना पड़ता है। इस संसार में आपका समय सीमित है, इसलिए समाज को नहीं बल्कि अपनी आत्मा को संतुष्ट कीजिए- इंसान हूँ शायद, इसलिए कुछ लोग पसंद नहीं करते, अगर पैसा होता तो, सभी लोग पसंद करते।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
कृपया लिंक को खोलकर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻



