सिलेंडर भैया
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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सिलेंडर भैया आजकल बड़ी किल्लत मचाए,
रसोई में जैसे सन्नाटा सा छाए।
चूल्हे की हंसी अब कहीं खो सी गई,
बिना तुम्हारे रसोई भी रो सी गई।
भूखे से बर्तन खामोश पड़े हैं,
जैसे सब सपने कहीं दूर खड़े हैं।
आटे की लोई भी इंतजार में है,
तवा भी जैसे किसी पुकार में है।
रसोई की रानी अब उदास बैठी है,
आंच बिना हर खुशबू रूठी है।
चाय की चुस्की भी अधूरी लगती,
सुबह की रौनक भी फीकी सी लगती।
तुम बिन हर स्वाद अधूरा लगता,
हर पकवान अब बेसूरा लगता।
जल्दी आओ, रसोई में रंग भर दो,
हर चेहरे पर फिर से उमंग भर दो।
सिलेंडर भैया, अब देर न लगाओ,
रसोई की खुशियों को फिर से लौटाओl
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश...

















