Monday, October 19राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

BLOG

स्व. उमाशंकर सिंह जी की स्मृति में
कविता

स्व. उमाशंकर सिंह जी की स्मृति में

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** कहाँ गया वो मुस्कुराता कारवाँ, कौन बताएगा, हर गली अब आपका किस्सा ही बस दोहराएगा। रसड़ा की राहें पूछती हैं, लौटकर कब आएँगे, सूना-सूना हर चमन अब अश्क ही बरसाएगा। जनसेवा की लौ जलाकर जो स्वयं सूरज बना, उसके जाने का अँधेरा उम्र भर तड़पाएगा। सिर्फ़ नेता ही नहीं थे, एक सहारा थे सभी का, नाम उनका हर धड़कन में सदा गूँजता जाएगा। वक्त ने कैसी लिखी तक़दीर, दिल यह मानता नहीं, इतना जल्दी छोड़ जाना हर किसी को रुलाएगा। बलिया की इस पावन मिट्टी का था वह गौरव महान, उनका हर संघर्ष इतिहासों में अमर हो जाएगा। बसपा का वह एक दीपक, आँधियों में भी जला, अब वही दीपक फ़लक पर बन सितारा छा जाएगा। "आनंद" की आँखों में भी आज सावन उतर आया, ऐसा जननायक सदियों में एक ही कहलाएगा। परिचय :- आनंद कुमार पांडेय पिता : स्व. वशिष्ठ मुनि पांड...
वीर सपूत
कविता

वीर सपूत

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** आजादी के वीरों सपूतों का, आओ यश गान करें! श्रद्धासुमन अर्पित कर, उनका हम सम्मान करें !! कतरा-कतरा खून देकर, जो देश बचाया करते है..! ऐसे वीर सपूतों का, हम सब यश गाया करते है !! घर से दूर सरहद में रहकर, देश का गान करते है! सर्दी, गर्मी, बरसात सहकर, तिरंगे की मान रखते है !! दुश्मनों से लड़ते-लड़ते, जो वीर गति को पाते है! ऐसे वीर सपूत जग में, मरकर अमर हो जाते हैं..!! आओ मिलकर देशहित में, कुछ अच्छा काम करें! पेड़ लगाकर धरती में, वीरों के हम नाम करें..! राष्ट्रहित में मर मिटने को जीवन अर्पण करते है ! ऐसे वीर सपूतों का हम, शत-शत वंदन करते है..!! परिचय :- प्रीतम कुमार साहू, गुरुजी (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणि...
सतरंगी दुनिया – ३५
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया – ३५

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** *अच्छे जरूर बनें, परन्तु जरूरत से ज्यादा नहीं। अगर ज्यादा अच्छे बनेंगे तो नीम्बू की तरह निचोड़ दिए जाओगे।* याद रखिए, जहां से छल शुरू होता है, वहां से महाभारत शुरू होता है। *जो चीज मन की शांति को छीन ले-उसे छोड़ देना ही समझदारी है; चाहे वह आदत हो, सोच हो या कोई रिश्ता।* एक बार थानेदार, कलेक्टर और मास्टर बैठे हुए थे। तब थानेदार ने शेखी बघारते हुए कहा-मेरा बहुत रौब है, जब जी चाहे, किसी को भी पीट सकता हूँ। इसका समर्थन करते कलेक्टर ने कहा- मैं भी जिले का राजा हूँ, मैं जो चाहे कर सकता हूँ। आखिरी में मास्टर ने कहा- मेरा तो काई रौब नहीं है, सारा दिन छात्रों को चाँटे मारता हूँ, आगे उनकी किस्मत-कलेक्टर बनें या थानेदार। शादीशुदा व्यक्ति की गर्लफ्रेन्ड उसके घर आई। उसको देखकर बीबी चिल्लाई और बोलने लगी- एक म्यान में २ तलवार नहीं र...
आधुनिक दरबार का तमाशा
कविता

आधुनिक दरबार का तमाशा

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** चारों तरफ धुआँ उठा है, तुम सिंहासन पर आँख मूँदे बैठे हो, राजकोष खाली पड़ा है, पर चेहरे पर शाही नूर ओढ़े बैठे हो, रंगमंच का वो मूक अभिनेता भी, तुमसे ज़्यादा समझदार निकला, तुम जलते हुए शहर में भी, जीत का जश्न साधे बैठे हो, शुक्र मनाओ इस बहरे दौर का, जिसने तुम्हें 'प्रधान' किया, वरना जनता के तीखे सवालों ने, कब का बेनकाब कर दिया होता, भूख की लंबी कतारों को, अब तुम 'अनुशासन की परेड' बताते हो, खाली पेट राष्ट्रवाद का राग फूंककर, तुम उत्सव मनाते हो, आईटी सेल के चारण-भाटों ने, तुम्हें एक ही मन्त्र सिखाया है, "साहेब अमर हैं", चाहे देश ने अपना सब कुछ गँवाया है, बेरोजगारी का ज्वर बढ़ा है? तो आंकड़ों से उसे डराओ तुम, संविधान की साँसें कम हैं? तो विज्ञापनों का ठहाका लगाओ तुम, नेताओं के चुनावी जुमलों पर, अब ...
अब सावन ये आया है
कविता

अब सावन ये आया है

डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' मंडला (मध्य प्रदेश) ******************** जेठ दुपहरी के दिन बीते, अब सावन ये आया है। काले काले इन मेघों ने, अमृत जल बरसाया है। वर्षा की नन्ही बूंदों ने, वसुधा को महकाया है। रीते-रीते नदी झरनों में, अब नीर भर आया है। पपीहा बोले मयूर नाचे, जंगल में उत्सव छाया है। जीर्ण शीर्ण इन वृक्षों में, नवपल्लव अब आया है। बारिश के इस मौसम ने, कृषकों को हर्षाया है। चूड़ी मेहंदी औ झूलों ने, गोरी को ललचाया है। मौन हुए अधरो ने अब, प्रेम रस छलकाया है। जेठ दुपहरी के दिन बीते, अब सावन ये आया है। परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंडला। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी ...
नीला अंबर नीला समंदर
कविता

नीला अंबर नीला समंदर

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** अंबर को निहारते मैं खो गई। ईश्वर ने ऐसा विशाल बनाया, उसे सूर्य, चंद्र और तारों से सजाया। जगत पिता जैसे शिक्षा दे रहे, आकाश से अनंत विचारों को विस्तृत करो। समंदर को देखो, अथाह गहरा, परंतु अपने में, कितने ही अद्भुत जीवन समाये रखें। लहरें जब ऊंचाई को छूने लगे, उन्हें सीमा से बाहर न निकलें यह कहें। जैसे कह रहा हो कैसी भी हो, स्थिति, जीवन के क्रिया कलापों को सीमित सीमा में बांधे रखें। अंबर से विशालता और समंदर से गहराई सीखो। मन भंवरा है, उसे ईश्वर की कृतियों से प्रेरित होकर, सुंदर सुघढ़ भावों के संयम में रखना ही जीवनकी सुंदरता है। प्रकृति चित्रण कह रहा, अनंत, गहरे और संयमित रहो। परिचय : आशा शर्मा पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश) सम्प्रति :...
सच है न
कविता

सच है न

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** अरे नेताओ। समाजवाद का नारा लगाने वालों क्या तुम देख रहें हों या नहीं, नहीं जो जरा अपनी अट्टालिकाओ से थोड़ा, झुककर, देखो नीचे सुबह-शाम चारों पहर। विक्षिप्त, विकलांग, हाथ आगे पसारते हैं और, और कहते हैं ओ अट्टालिका के वासी तू, हां तू आत्मा के अधीन नहीं कुर्सी के अधीन है। क्या ये सच नहीं है सच है न। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच...
भस्म रमा के करूँ आरती
स्तुति

भस्म रमा के करूँ आरती

प्रतिभा दुबे "आशी" ग्वालियर (मध्य प्रदेश) ******************** भस्म रमा के करूँ आरती, भोलानाथ जी भोलानाथ जी डम डम डमरू बाज़ रहा है, नंदी द्वारा तेरे भक्त खड़ा है।। शिव शंकर अब कृपा बरसाओ, महादेव जी महादेव जी अंबर से जल बरस रहा, पावन जल से अभिषेक करवाओ।। भक्तिभाव से जो तुमको ध्यावे, लौटा जल ले आप चढ़ावे विल्व पत्र संग करें प्रार्थना, भोले घोटा भांग धतूरा चढ़ावे।। करते हैं कृपा शिव शंकर, शंकर स्तुति जो सच्चे मन ध्यावे शरणागत ले प्रभु, भोले भव सागर से भक्त को पार लगावे।। देखो कांवड़िया जल ले आते, बड़े आदर से जल धार चढ़ावे मन की भक्ति ही है शक्ति, श्रावण माह विशेष बन जावे।। हरि के भक्त भी हरि कहावे, नाग देवता भी हरि हो जावे देख प्रभु को प्रसन्न रहे सब, ॐ नमः शिवाय धुन गावे।। देवता भी नतमस्तक होवे, डम-डम डमरू की ध्वनि गूंजती महादेव जी के ग...
हम साहित्य के नये परिंदे हैं
कविता

हम साहित्य के नये परिंदे हैं

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** जान लें आप कि हम तो साहित्य के नये परिंदे हैं। मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।। काव्य के प्रति अनुराग हमारा, अंतर्मन में हर्ष लिए। लेखन के प्रति नवल चेतना, हर पल ही संघर्ष लिए।। भले नये पर करें साधना, हमने लिखना जाना है। अनुशासन में रहते हैं नित, हमने सच पहचाना है।। हम वो नहीं हैं जिनके लिए साहित्य के फैले धंधे हैं। मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।। लिखते भी हैं, पढ़ते भी हैं, उड़ना सीख रहे हैं। गिरते भी हैं-उठते भी हैं, लड़ना सीख रहे हैं।। सबके हित के भाव सँजोकर लिए चेतना हम भी। भले नये हैं, पर हैं चोखे, करें साधना हम भी।। साहित्य का मूल्य जानते हम, कदापि न हम अंधे हैं | मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।। कुछ वरिष्ठ आँखें दिखलाते, कहते मूरख हमको। कहते ...
गुरु जनो को प्रणाम
कविता

गुरु जनो को प्रणाम

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** ज्ञान गुरुओं से मिला बाँधे कैसे एक क़तार। मात, पिता प्रथम गुरु दूसरा यह संसार। पुस्तक ज्ञान शिक्षा से मिला शिक्षक बने आधार। लोकोक्तियाँ ज्ञान की पढ़कर अनुभव का पाया सार। पत्नी, बच्चों से गृहस्थ जीवन की कलपना हुई साकार। बन्धु बांधवों से मिला एकता का उपहार। मित्रों ने ख़ुशियाँ देकर सिखाया बाटों आपस मे प्यार। कार्य क्षेत्र ने दुनियादारी सिखाई करें कैसे व्यवहार। जीवन में सब गुरु हमारे करते सब का हम वन्दन। गुरु दक्षिणा मे सब को हमारा सादर नमस्कार। परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक : १४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन...
कंकर में शंकर
कविता

कंकर में शंकर

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** कंकर-कंकर में बसे, मां नर्मदा के शंकर। भक्तों के हृदयों में बसे, भोले डमरू वाले। शिव ही, सत्य अविनाशी। नर्मदा के हर कंकर बोले "ॐ नमः शिवाय" कंकर-कंकर में शिव का दर्शन। डमरू की धुन सुन, दुनिया सारी झूमे। भोले बाबा तेरी, लीला महिमा न्यारी। कंकर-कंकर में शंकर, श्रद्धा से सुमन चढ़ाते। ऊं नमः शिवाय कर भोले के गुणगान गाते। जो भी शरण में आते। बेड़ा पार लगाते। कंकर-कंकर में शंकर, मां नर्मदा के कंकर पूज्यनीय शंकर। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करव...
आहा ग्राम्य जीवन! सुनो, सुनो मेरे विकास की कहानी…
व्यंग्य

आहा ग्राम्य जीवन! सुनो, सुनो मेरे विकास की कहानी…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** हे पथिक, ज़रा ठहर। हाँ, तू शहर से आया है, मुझे पता है क्यों आया है। “आहा ग्राम्य जीवन” की पीएचडी करने निकला होगा। आ, मेरी छाँव में बैठ जा। जुगाड़ की सवारी ने तेरी रीढ़ की हड्डी को लोकतंत्र की तरह ढीला कर दिया होगा। मैं इस गाँव का बरगद हूँ,पुराना, अनुभवी और वक्त के थपेड़ों से घायल होकर बेकार घोषित हो चुका हूँ। पहले मेरे नीचे प्रेम कहानियाँ पनपती थीं, अब योजनायें और घोषणाओं के पोस्टर चिपकते हैं। प्रेम के नाम मिट गए, विकास के वादे चिपक गए, दोनों का हश्र लगभग एक जैसा ही है। तू पूछेगा, गाँव कितना बदला? तो सुन, गाँव बदला नहीं, बदलने की घोषणाएँ बार-बार हुई हैं। यहाँ “विकास” कम, “बदला” ज़्यादा चलता है। लोग बच्चे इसलिए पैदा करते हैं कि कोई तो पुरखों की दुश्मनी का ईएमआई चुकाए। परिवार, मोहल्ला, पू...
हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा
ग़ज़ल

हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा, ज़िंदगी तुझको भी आसान बना कर देखा। दिल में उम्मीद का इक दीप जलाए रखा, हर एक अँधेरे को चराग़ बना कर देखा। जो भी पत्थर थे, वो किरदार सिखाते ही रहे, हमने हर ज़ख़्म को अरमान बना कर देखा। नफ़रतों से न कभी घर कोई आबाद हुआ, प्यार को सबसे बड़ा मान बना कर देखा। सच की राहों में भले काँटे बहुत मिलते हैं, हमने हर मोड़ को मैदान बना कर देखा। झूठ की उम्र तो होती है ज़रा-सी लेकिन, सच को सदियों का निगहबान बना कर देखा। जो सितमगर थे अब उन्हीं से नयी राह मिली, जो थे तलवार उन्हें म्यान बना कर देखा। जिंदगी का सफर आसान नहीं होता मगर, मैंने उनमें भी इक उड़ान बना कर देखा। इश्क में रिश्क है पर इश्क है सभी से हमें, आज सरेआम अपना काम बना कर देखा। "आनंद" अपनी क़लम बिकने न देना हरगिज़, नाम को ह...
हरेली तिहार
कविता

हरेली तिहार

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी बोली) बरखा रानी आगे, धान ह बोंवागे। हरियर रंग छागे, किसान के भाग जागे।। भुईयाँ महतारी के होगे सिंगार। चलव मनाबो हरेली तिहार।। अमावस के दिन ह, हे बड़ पावन। बरस के पहिली परब, हे मनभावन।। नांगर, कुदरी के पूजा करहीं संसार। चलव मनाबो हरेली तिहार।। लईका मन बाँस के गेड़ी खपाहीं। रचमच-रचमच चघे, गली-खोर म आहीं।। जम्मों कोती बगरही खुशी के उजियार। चलव मनाबो हरेली तिहार।। गुरतुर गुड़हा चीला ह बिकट मिठाही। माईलोगिन मन उकेरहीं चित्र सवनाही।। कुटकी देबी ह करही जन के उद्धार। चलव मनाबो हरेली तिहार।। बरदिहा, पहटिया मन डारी खोंचे आहीं। लोहार मन चौंखट म खीला गड़ियाहीं।। गोरइंया देवता ह सुनही सबके पुकार। चलव मनाबो हरेली तिहार।। परिचय : अशोक कुमार यादव निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़) संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., ...
कविता जीवन में बस लड़ना
कविता

कविता जीवन में बस लड़ना

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** जीवन में जन्म से मृत्यु तक के हर मोड़ पर पड़ता है स्वयं को खुशी गम से पड़ता है लड़ना, सांस चलती रहती है मन कहता है नहीं रुकना धीमे तेज बस, है चलना जीवन में बस है लड़ना भरोसा नहीं कब कहां कैसे खड़ी मुसीबतों मंडराती संबलकर बुद्धि विवेकपूर्ण विचारों से खुद को आसानी से कहीं सँघर्षरत रहकर कहीं दिमागी संतुलन से आखिरकार पड़ता है लड़ना आंधी तूफान ओला बरसात की बिन कहे दिखती है, अद्भुत मार पड़ता है खुद के निर्णयों से सुरक्षित कवज पहनना अधर में पड़े रहने की घड़ी में चाहे अंधकार हो या हो उजाला, जीवन में हरवक्त, जीवन सिखाता बस नाम है जीवन जीवन में बस है, लड़ना परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी ...
सिधवा आदमी अउ सोझ गोठ
आंचलिक बोली, कविता

सिधवा आदमी अउ सोझ गोठ

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी बोली) सिधवा आदमी अउ सोझ गोठ, फांक मिलय चाहे कड़कड़ नोट, छल-कपट के रस्ता ला छोड़, सच्चाई से सदा रखथें जोड़, मन के भीतर कोनो कसर नइ, बाहर तौने, भीतर घलो वोइ, नइ जानय वो चलाकी के खेल, सबो संग रखथे मया के मेल, अमृत बरोबर ओकर बानी, सरल सुभाव ह ओकर निसानी, दुनिया भले कहय ओला भोला, परम संतोख के ओढ़े हे चोला, मेहनत के ओ खाय कमाय, कुटिल मन ओला कभू नइ भाय, बांटय मया अउ बांटय हांस, ओकर रहनी-कहनी म बिस्वास, झूठ के कोठार ले वो दूर, अपन धरम म रहिथे चूर, पर पीरा ला अपन वो जानय, सबो ला अपन संगी मानय, लइका मन असन निस्छल हांस, चंदन कस महके ओकर सांस, दुनिया म अइसन मनखे हे अनमोल, कोनो नइ लगा सकय ओकर मोल, सिधवा रहि के जियत हे जीवन, ओकरे दुआरे खुश हे भुवन। परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी नि...
हिंदी है दिल की धड़कन
कविता

हिंदी है दिल की धड़कन

सुषमा शुक्ला इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हिंदी है दिल की धड़कन, मातृभूमि की शान, इसके बिना सूना लगे, भारत का हर आँगन। विश्व हिंदी दिवस लाया, नए रंग, नई बहार, सुनो, जागो, बोलो इसे, बनाओ इसका सार। सिंहावलोकन में यह, साहित्य की रोशनी, कवियों की गूँज में, रचा है जीवन की धुन। तुलसी, मीरा, सूर और रसखान की छवि, हिंदी ने सजाई है, संस्कृति की अनूठी कुंजी। शब्दों में है शक्ति, भावों में है जादू, जिससे जुड़कर हर मन में खिलता सुख-सद्गुण का वसु। भाषा सिर्फ शब्द नहीं, यह है आत्मा की छाया, विश्व हिंदी दिवस पर इसकी करें हम गगन-गुंजाया। स्कूल और कॉलेजों में गूंजे इसकी मधुर तान, हिंदी के संग बच्चों का बढ़े ज्ञान। जितनी भी दूरियाँ, मिटा देती यह भाषा, एक करती मनुष्य को, बनाती जग में आशा। आज हम सब करें प्रण, इसे रखें सजग, सशक्त, हिंदी ही है वह दीप, जो जगमग करे स...
हम बलिया वाले बागी है
कविता

हम बलिया वाले बागी है

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** है वीर भूमि है अमर भूमि, है अमर यहाँ की गाथा। लगता है अपने हाथों से , इसे सृजित किए हैं विधाता।। मेरा जन्म हुआ उस धरती पर, जहाँ जन्मे ऋषि मुनि त्यागी हैं। हम बलिया वाले बागी हैं।। मेरे बगावती तेवर हैं, हम जुल्म नहीं सह सकते हैं। हैं शेर-ए-दिल बलिया वाले, करते हैं वही जो कहते हैं।। फौलाद भरे हैं सिने में, नश-नश में ज्वाला जागी हैं। हम बलिया वाले बागी हैं।। यही भृगु,वाल्मीकि,परासर, महा ऋषि की तपोभूमि। कोसल साम्राज्य का हिस्सा भी, है ऐतिहासिक युद्ध भूमि।। सन् 47 से पाँच साल, पहले हीं मिली आजादी है। हम बलिया वाले बागी हैं।। नफरत का बीज न बोना है, बस नेक इरादें रखना है। हो गांव-गांव विकसित अपना, सच बोलने से नहीं डरना है।। मत राजनीति के पलड़े पर, तोलो हमने ये ठानी है। हम बलिया वाले बागी है।। यहाँ ग...
शीतल मंद पवन के झोंके
कविता

शीतल मंद पवन के झोंके

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** शीतल मंद पवन के झोंके, मन आह्लादित कर देते है। गर्मी से राहत दिलवाकर, तन में ऊर्जा भर देते हैं। शीतल मंद ... परमेश्वर है बड़ा दयालु, सृष्टि का पोषण करता है। जाड़ा, गर्मी और वर्षा से, कृषकों को वो तृप्त करता है। धूप,हवा और जल पीने मिट, हम निः शुल्क प्राप्त करते है। शीतल मंद ... सृष्टि का वो सृजनहार है, और वो ही पोषण करता है। पर मनुष्य है बड़ा स्वार्थी, वो अनुचित शोषण करता है। करे सभी का हित परमेश्वर, हम प्रतिदिन विनती करते है। शीतल मंद ... ईश्वर है करुणा का सागर, वो हरपल करुणा करता है। कोई जीव न भूखा सोए, इसकी वो चिंता करता है। जिसपल शरणागत हो पाते, हम उसका दर्शन करते हैं। शीतल मंद ... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह ...
कुछ स्त्रियां
कविता

कुछ स्त्रियां

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* कुछ स्त्रियों ने अक्सर मौन को चुना वो चिल्ला भी सकती थीं वो दुनिया को अपनी परेशानी बता भी सकती थी वो अपनी आंखों में आंसू दिखाकर लोगों के दिल में जगह बना भी सकती थी वो चाहती तो कर सकती थी एक जंग का ऐलान फिर से वो चाहती तो फिर कई युद्ध करा भी सकती थी वो चाहती तो छोड़ कर मान मर्यादा समाज की धज्जियां उड़ा भी सकती थी तोड़ कर भरम रिश्ते नातों का वो निकल दहलीज से बाहर जा भी सकती थी वो चुन सकती थी ऐसी कई राहें जहां उसकी मुश्किलें आसान हो जाती जहां उसे किसी को कोई जवाब देना अनिवार्य नहीं होता। वो चाहती तो कर के भंग घर की शांति को कलह क्लेश से घर का माहौल बिगाड़ भी सकती थी मगर फिर भी उसने मौन चुना, क्यों? क्योंकि वो नहीं चाहती युद्ध कोई वो नहीं चाहती कि केवल अपने मन की शांति के लिए वो ...
सतरंगी दुनिया – ३४
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया – ३४

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  यदि इंसान शिक्षा से पहले संस्कार, व्यापार से पहले व्यवहार, भगवान से पहले माता-पिता को पहचान ले हो तो ज़िंदगी में कभी कोई कठिनाई आ ही नहीं सकती। हैसियत का परिचय हमें तब देना चाहिए, जब बात आत्म सम्मान की हो। अन्यथा सादगी ही सबसे बड़ा परिचय है। *सुख में शांति है, यह हमारा भ्रम है। शांति में सुख है, यह वास्तविकता है।* हम लोग उस जमाने की पैदाइश हैं, जब रोते हुए को चुप कराने के लिए दोबारा पीटा जाता था। कभी-कभी कुछ लोग ज़िंदगी में सबक बनकर आते हैं। आँखों में ऐसी धूल झोंक जाते हैं, कि पहले से ज्यादा साफ नजर आने लगता है। भले ही आप अलग रहिए, मगर अपने माता-पिता और भाइयों से जुड़े रहिए, क्योंकि मुसीबत में यही अपने आपके आसपास नजर आएँगे, बाकी की दुनिया हाल पूछने भी नहीं आएगी। समय, सेहत, दोस्त और और व्यापार ऐसे कीमती निवेश हैं, जो...
हृदय में गंगा जमुना सरस्वती
कविता

हृदय में गंगा जमुना सरस्वती

सुषमा शुक्ला इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हृदय में गंगा की निर्मल धार बहती, सपनों की तर्जनी को छूती रहती। शांति का संदेश लहरों में गूँजता, मन के अंधेरों को रोशनी देती रहती। जमुना की मृदुल धारा जैसे गीत सुनाए, स्नेह और करुणा के मोती हर ओर छाए। मन की प्यास को मीठे जल से भरे, जीवन के हर दुख को सहज ढंग से मेटाए। सरस्वती के स्वर में ज्ञान की लहर है, कविता, कला और शास्त्र की अमर बहार है। हृदय में जब ये तीनों मिल जाएँ, सपनों की दुनिया में उजियारा अपार है। गंगा की शुद्धता, जमुना का स्नेह भरा, सरस्वती का ज्ञान, सबको राह दिखा। मन में समेटे यदि हम इनकी अमृत बूंद, जीवन बने पावन, हर क्षण सुखमय झूम। हृदय की प्यास इन धाराओं से मिटे, जीवन में प्रेम, शांति और ज्ञान मिलते। गंगा जमुना सरस्वती का संग पाकर, मन का मंदिर सदैव दिव्य रूप में खिलते। परिचय :- ...
विद्या
कविता

विद्या

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** कक्षा एक तमाशा शिक्षक एक भक्षक सन्चालक शोषक पालक केवल दर्शक इस कलियुग मैं विद्या के नाम आडम्बर सन्सार एक नाटक और रचयिता ईश्वर। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०२३" से सम्मानित हैं। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
भावनात्मक और आध्यात्मिक पवित्र माह- सावन
आलेख

भावनात्मक और आध्यात्मिक पवित्र माह- सावन

अमित राव पवार देवास (मध्य प्रदेश) ******************** जब तपती धरती वर्षा की पहली बूंदों से शीतल होती है, जब सूखे वृक्षों पर फिर से हरियाली लौट आती है और जब वातावरण में मिट्टी की सोंधी सुगंध जीवन के पुनर्जन्म का एहसास कराती है, तभी भारतीय संस्कृति का सबसे भावनात्मक और आध्यात्मिक पवित्र माह-सावन आरंभ होता है। यह केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि मनुष्य, प्रकृति और परमात्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का काल है। भारतीय परंपरा ने सावन को मात्र धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं माना, बल्कि आत्मशुद्धि, सामाजिक अनुशासन, स्वास्थ्य-संरक्षण और पर्यावरण चेतना का जीवंत पर्व बनाया है। यही कारण है कि सहस्राब्दियों बाद भी सावन की प्रासंगिकता अक्षुण्ण बनी हुई है। आज जब मनुष्य अभूतपूर्व भौतिक प्रगति के बावजूद मानसिक तनाव, सामाजिक विखंडन और पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है, तब सावन का ...
निश्चल संवेदना
कविता

निश्चल संवेदना

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** बदलते वक्त के साथ बहुत कुछ बदलता देखा मित्र को शत्रु बनते शत्रु को मित्र बनते देखा। जानता भी नहीं था जिनको उनको अपना बनते देखा और जानता था जिनको11 उनको पराया होते देखा। भागता रहा हमेशा ही अपनों की तलाश में खोजता रहा भावनाओं के द्वार हर किसी के हृदय में। अन्वेषण करता रहा विचारों को समझने वालों की खोजता रहा मन के मीतों को जो समझ जाए मेरे हृदय की हर निश्चल संवेदनाओं को। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻...