मौसम की शरारत
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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मौसम ने की शरारत और
बहारों ने पैगाम लिख दिया
नभ से दूर चाँद आज देखो
स्याह जुल्फों ने छिपा लिया
पवन पालने झूले अरमान
तारों को हँसना सिखा दिया
बहना अल्हड़पन में झरनों को
झरते नयनों ने सिखा दिया
घंघरू खनक गजरे महक
बहकना सुरों को सिखा दिया
सतरंगी सपनों ने मन के हया
में हिना का रंग मिला दिया
खंजनी अखियों का जालिम वार
हुश्न को कातिल बना दिया
अधरों की छुअन से सरगम ने
भँवरों को गाना सिखा दिया
यौवन भार से झुकी देह ने
शर्माना फूलों को सिखा दिया
मिलना दिलों का चुपके-चुपके
राज को राज रहना सिखा दिया
पीहू पीहू करे प्रेम में मनवा
प्रीत का उन्माद बढा दिया
जमुना तट पर रास रचे फक्कड़
राधा माधव को मिला दिया
दिन चढे चाहे रात ढले पल पल
प्यार में बस गुजार दिया
बिखरा रंग प्यार का ऐसा
नफरत करना ...


















