गुरु जनो को प्रणाम
कमल किशोर नीमा
उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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ज्ञान गुरुओं से मिला
बाँधे कैसे एक क़तार।
मात, पिता प्रथम गुरु
दूसरा यह संसार।
पुस्तक ज्ञान शिक्षा से मिला
शिक्षक बने आधार।
लोकोक्तियाँ ज्ञान की पढ़कर
अनुभव का पाया सार।
पत्नी, बच्चों से गृहस्थ जीवन की
कलपना हुई साकार।
बन्धु बांधवों से मिला
एकता का उपहार।
मित्रों ने ख़ुशियाँ देकर सिखाया
बाटों आपस मे प्यार।
कार्य क्षेत्र ने दुनियादारी सिखाई
करें कैसे व्यवहार।
जीवन में सब गुरु हमारे
करते सब का हम वन्दन।
गुरु दक्षिणा मे सब को हमारा
सादर नमस्कार।
परिचय :- कमल किशोर नीमा
पिता : मोतीलाल जी नीमा
जन्म दिनांक : १४ नवम्बर १९४६
शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी.
निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश)
रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन...




















